बढ़ गया रंग रूप , कोई न दिखे कुरूप,

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offtracknews
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बढ़ गया रंग रूप ,
कोई न दिखे कुरूप,
अब तो मोबाइल से,
बनते महान है !

बदली है भेष भूषा,
भाये न अब मंजूषा,
होकर आजाद अब
करते गुमान है !

रखे न बड़ो का मान,
करे अपना सम्मान,
संयुक्त परिवारों से ,
घटती जो शान है !

आधुनिकता की शैली
बुजुर्गों की गति मैली,
कैसा अपना देश ये,
कैसा स्वाभिमान है!
मोहिनी गुप्ता
गोला(खीरी)उ.प्र.

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