बोलो क्यों न कुछ बोल रही हो तुम

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offtracknews
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क्या हुआ है तुमको  ,
क्यों न कुछ बोल रही हो तुम  ?
चीख रहा है #अंतर्मन  ,
क्यों न कुछ बोल रही हो तुम   ?
लुट गयी हाँ तेरी अस्मत ,
पर सोचो क्यों भोग रही हो तुम ?
जिसने लूटी अस्मत ,
उसको क्यों खुला छोड़ रही हो तुम_  ?
भूख जगी है इन हैवानों को जिस्मों की
इन भूखे भेड़ियों का क्यों न मुंह तोड़ रही हो तुम  ?
कह रहा है वो तन दिख रहा था तेरा  ______
दोष मढ़ रहा है तुमपे, क्यों न बोल रही हो तुम ?
डेढ़ साल की बच्ची हो या  छःमाह की बच्ची  ,
सबकी लुट रहा वो अस्मत, क्यों देख रही हो तुम ?
टूटा अंतर्मन है सबका, बिन दोष बिन अपराध के ,
चुरा रहे हैं नजरें तेरे निर्दोष माता पाता   ~~~
डर डर के हो जिती, क्यों न पोल खोल रही हो तुम  !!
हो सके तो समझो इसमें दोष भला है किसका_____
तेरी बस एक चुप्पी बढ़ा रही है दरिंदों की हिम्मत   /
झूठी इज्जत खातिर, खोखले समाज की खातिर ,
क्यों मुंह पर दुपट्टा ओढ़ रही हो तुम !
एक कदम तुम्हारा है उनके फांसी का फंदा  !!
सहमी सिमटी, क्यों खुद को कमजोर समझ रही हो तुम ?
चुप रह कर उन बलात्कारियों को  ,
क्यों जिन्दा छोड़ रही हो तुम  ?
देखो फैल रही है दरिंदगी  ,
चुप क्यों हो क्यों न बोल रही हो तुम  ?
जीवन मिलता है एक बार,
इसको न्याय अन्याय के तराजू में क्यों तोल रही हो तुम  ?
बिन अपराध हो घुट घुट जिती ,
सारे बंधन तोड़ क्यों न #अन्तर्मन खोल रही हो तुम……?
रुबी प्रसाद 
सिलीगुड़ी

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