एक पत्र बेटी के नाम

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प्यारी बिटिया,

        ईश्वर से सदा ही तुम्हारी कुशलता चाहता हूँ।वैसे तो मैं तुम्हारे स्वभाव और आत्मविश्वास से पूर्णतया परिचित हूँ और कदाचित इसलिये ही मैंने तुम्हें सँयुक्त परिवार में देने का निर्णय लिया।तुमने अपने समीकरण अब तक बना भी लिये होंगे,और बना भी रही होगी।
हालाकि सँयुक्त परिवार प्रथा अब समाप्त सी हो रही है परन्तु इसकी विशेषता तो अलग ही है।तुम्हारा मिलन स्वभाव और घुलमिल जाना तो इसमें एक चम्बक का कार्य करेगा।इसमें तुम बिल्कुल सुरक्षित रहोगी और तुम्हें सबका प्यार भी मिलेगा।
चाहे जो भी हो सोच हमेशा अपनी पौज़िटिव रखना,समर्पण भाव भी रखना।तुम्हें मृदु और मधुर रहना है लेकिन रिजिड भी रहना है।यदि कोई दमन की बात भी करे तो अपने को लक्ष्मण रेखा में रहकर उसे हल करना है।तुम अच्छी पढ़ी लिखी हो और तुमने तो समस्याओं का सामना भी किया है और उन्हें सुलझाया भी है।
       कोई चिन्ता न करना और घर के बच्चों को सँरक्षण देकर उनका दिल जीतना।बच्चों में पौज़िटिव इनर्जी और निर्मलता होती है।वे तुम्हें तनावमुक्त रखेंगे।
तुम मेरी बेटी हो और खामखाँ का तनाव हमारे स्वभाव में नहीं है।
शेष फिर।मेरी ओर से सबको यथायोग्य।

                                                                 सुमित्रा नंदन पन्त

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