Monday, December 11, 2017

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मन रे भज हरि-पद-कमल।

मन रे भज हरि-पद-कमल। जिन चरनों की महिमा न्यारी, पद-रज ने कितनों को तारी। शीतल,सुखद अमल।।मन रे! हरि-पद पूजे चित सँवरत है, नयनों में नव ज्योति जरत है। होते दुख...

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मन रे भज हरि-पद-कमल।

मन रे भज हरि-पद-कमल। जिन चरनों की महिमा न्यारी, पद-रज ने कितनों को तारी। शीतल,सुखद अमल।।मन रे! हरि-पद पूजे चित सँवरत है, नयनों में नव ज्योति जरत है। होते दुख...

सर्द रातों में माहताब भी काँपने लगा,

सर्द रातों में माहताब भी काँपने लगा, सुबह सिकुड़ने लगी आफताब हाँपने लगा। कोहरे की फैली घनी चादरों के आगे, कुदरत का सारा हिसाब काँपने लगा। डंक सी...
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हमारे प्यार की तारीफ़ करती है दुनिया II

कभी भी आपको इतना खफा नहीँ देखा  किसी के दर्द में यूँ मुब्तिला नहीँ देखा  ये गलियां इश्क कीं इस मोड़ पे ले आयीं हैं  मैं कैसे...

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