जिनका क्षर होवै नहीं,अक्षर वो कहलाय

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जिनका क्षर होवै नहीं,अक्षर वो कहलाय।
अक्षर-अक्षर जोड़कर,शब्द कई बन जाय।।

शब्द बहुत छोटे दिखे,प्रबल करें पर मार।
धूप – छाँव,सुख – दुख लिए,आते बारंबार।।

शब्द  दिवस  हैं -रात हैं,शब्द महीने-वर्ष।
शब्द   विषाद भरे  यहाँ , शब्दों से ही हर्ष।।

ऋषियों ने जग को दिया,शब्दों का उपहार।
शब्द बिना पशु सम निरा,यह सारा संसार।।

अमित कुमार दुबे
स्वरचित/मौलिक

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