मन की बात आपके साथ

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offtracknews

आज प्रस्तुत है मन की बात आपके साथ ।न मँझी लेखिका हूँ न बनाबट से लिखती हूँ। नही आते छंद ।न दोहा ,चौपाई में शब्दों को पिरोना ।बस मन की भूमि पर अंकुरित भाव ,जो वहीं ठहर नहीं पाते ।लिख देती हूँ आपके लिये ।अनगढ़…।💐💐💐💐💐
मन का चाक …
‘मन’ के चाक पर रखी थी भावनाओं कि मिट्टी
चाक घूम रहा था ,भावनायें ले रहीं थी रूप
पहले अनगढ़,फिर ….
थोड़ी सँभल सँभल
कुम्हार के हाथ नहीं थम रहे थे
रूप बदल कर निकल रही थी आकृतियाँ..।
कोई दिलकश,कोई मनहारी
कहींकुछ अनकहा ..
अनवरत चल रहा था चाक .
और जन्म ले रही थी
#रचना
आत्मा से निकल रही थी
दर्द ,टीस ,आँसू,आहें..
वेदना ,मिलन ,वियोग …
समझा कौन ??
किसी को महज शब्द
दिखे ,
कोई तुलना में लगा रहा .
भूल जाते हैं जब भी नवजीवन अंकुरित होता है
झेलना दर्द #कुम्हार को ही पड़ता है ।
ना शिल्पी हूँ ,न मँझी हुई लेखिका .
भावों को ही सदा अर्पण किया ..

पाखीमन…

 

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