मेरे पापा को गए बीस साल बीत चुके हैं

 मेरे पापा को गए बीस साल बीत चुके हैं

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 मेरे पापा को गए बीस साल बीत चुके हैं। मेरे पापा का ये पत्र 27 साल पहले मेरी शादी के 20 दिन बाद मुझे मिला था। पत्र लगभग ज्यों का त्यों है।आज का विषय पढ़कर स्वयम को रोक न सकी।अब आप सबसे शेयर कर रही हूं।
प्यारी गुड़िया रानी
खूब सारा प्यार दुलार।
अत्र कुशलम तत्रास्तु। बेटा, जबसे तू गई है,हम तो अधूरे से हो गए हैं। आदतन ,सुबह तुझे आवाज लगाता हूँ, गुड़िया….गुड़िया, उठ जा बेटा, चाय बना दे। दो तीन बार बोलने पर तेरी मम्मी की आवाज आती है ” गुड़िया तो गई”, मैं बना रही हूं चाय। तू बहुत याद आती है बेटा। भूल जाता हूँ कि मेरी चिड़िया का बसेरा अब दूसरे आँगन में हो गया है।
मेरे घुटनों में तेल लगाना हो या मुझे मलाई डालकर दूध पिलाना हो या चीजों को यथास्थान रखना हो तू मेरी माँ बन जाती थी। और हाँ, अब मेरी पीठ भी कोई नहीं खुजाता। अब परसों ही प्रेसवाला कपड़े नहीं लाया बिना प्रेस की शर्ट पहन कर ऑफिस जाना पड़ा। तू होती तो…..
और हाँ ! आज तेरी ताईजी आई थी। तेरी मम्मी घर पर नहीं थी तो ऋतु को कह रही थी ,आज पता चल रहा कि उमा घर पर नहीं है। पहले तो गुड़िया होती थी कुछ पता ही नहीं चलता था।
आज तुझे एक राज की बात बताता हूँ। तुझे याद है जब तेरी स्टेट लेबल की डिबेट मेरे ऑफिस के पास ही थी। मैं आया था तुझे सुनने, और जब फर्स्ट प्राइज मिला था तुझे, तब बड़ा गौरवान्वित हुआ था मैं।और ऑफिस आकर लड्डू बांटे थे मैंने।अब न जाने कौन-कौन सी बातें याद आती हैं तेरी।
बेटा, तू गुरुर है मेरा। मैं बड़ा सौभाग्यशाली हूँ कि तू मेरा अंश है।गुड़िया ससुरालियों का भी मान बढाकर गुरुर बनना उनका। जानता हूँ मेरी बेटी बहुत समझदार है, और मानता हूं कि शुरू -शुरू में नई जगह, नया परिवेश, नए लोग कुछ दिन अचकचापन जरूर देंगे,लेकिन फिर धीरे-धीरे वही तेरा जीवन भी बन जायेंगे। बेटा, जिस अपनेपन से तू हमारा ध्यान रखती थी ,उसी तरह वहाँ भी सबको अपनाना। तेरे बिना हम जरूर बिखर गए हैं, पर बेटा वहाँ सबको समेट कर रखना।
अभी तो सारे दिन घर में तेरा ही नाम गूँजता रहता है। वक्त रहते हम भी आदी हो जाएंगे तेरे बिना जीने के। क्या करें बेटा-यही रीत है जीवन की। इसे तो निभाना ही है। तेरी मम्मी भी बहुत याद करती है तुझे पर कहती नहीं। बाकी सब ठीक है ।सबको हमारी ओर से यथायोग्य, एवम “कुंवर सा” को विशेष प्यार कहना। पत्रोत्तर शीघ्र देना।
प्रतीक्षारत
पापा

वर्षा अग्रवाल (विजेता)

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