नन्ही परियों की तरह II

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छोटी सी प्यारी सी नन्ही सी
बेटी है एक परी
खुशियों की बहारों में
झुमती रहे
गाए मुस्कुराए
संगीत की तरह
वो तो लगे
परियों के गीत की तरह
खिलती हर चमन में
वो गुलाब की तरह
उड़ने दो फिजा में
इन्हे पंक्षियों की तरह
खिलने दो बागों में इन्हें
हर फुल की तरह
संदेश दो सींचने का
हर माली की तरह
महसूस हो इन्हे अब
हैं हम बेटों की तरह
मिटा के भेद-भाव
बेटे-बेटियों का अब
जीने दो इन्हे
नन्ही परियों की तरह

संत कुमार सोनू (विजेता)
स्वरचित

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