शब्द कटोरा नेह भरा , शब्द कलह संसार

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1.
शब्द कटोरा नेह भरा , शब्द कलह संसार ।
प्रेम संकुचित वो करे , वही करे विस्तार ।।
2.
शब्द स्वयं बेजान हैं , भरती अर्थ जबान ।
होता जैसा टोन है , वैसा होता भान ।।
3.
अर्थ शब्द का बदलता , समय समय की बात ।
प्यार मिला था जिनसे , उनसे ही आघात ।।
4.
कहा अधिक कम शब्द में ,  होता अच्छा मीत ।
शब्द बचत से जगत को , करनी होगी प्रीत ।।
5.
प्रेम प्यार के शब्द का , होता अलग प्रभाव ।
अपशब्दों के तीर से , पौधों  तक में घाव ।।
6.
मोल समझकर शब्द का , करते जो उपयोग।
खुशी ‘ हितैषी ‘, जगत में ,पाते हैं तब लोग ।।

******मौलिक******स्वरचित*******
     प्रबोध  मिश्र  ‘ हितैषी ‘ ( विजेता )

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