Saturday, December 16, 2017
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न जाने जमाने को क्या हो रहा है।

न जाने जमाने को क्या हो रहा है। हरिक आदमी खुद खुदा हो रहा है।। जमी धूल रिश्तों की चादर पे ऐसी । दिलों में कहीं फासला...

भूख बड़ी ही गजब चीज हैं,कुछ भी करवा जाती हैं। 

भूख बड़ी ही गजब चीज हैं,कुछ भी करवा जाती हैं। या  तो  खुद  मर  जाती  हैं  या,दूजों को मरवाती हैं। जो भी करना ना चाहें  हम,...

भारत में दिन कितने अच्छे हैं।

भारत में दिन कितने अच्छे हैं। रोटी को तरसते यहाँ बच्चे हैं।। नकली यति बन देश को लूटा। आज के साधु कितने सच्चे हैं।। भूख इस कद्र देखी...

मंजिल को पाने को राही,ठोकर तो खानी ही होगी,

मंजिल को पाने को राही,ठोकर तो खानी ही होगी, कठिन मार्ग है पहले खुद को,राहें तो बनानी ही होगी। मुश्किल देख राह से मुड़ना,है बहुत बड़ी...

भास्कर मेला, धूप छाँव का खेला,अक्षरी साँझ

भास्कर मेला, धूप छाँव का खेला,अक्षरी साँझ रवि निःसृत, पलछिन आराम, शिखरी साँझ किरण छाँव  ,महावर ले पाँव,  उतरी साँझ जोगन प्रभा ,अन्तःस्थल आदित्य,सिंदूरी साँझ निशा सहेली, सिंधु...

गांव हो या शहर बात ये आम है।

गांव हो या शहर बात ये आम है। प्लास्टीक का कहर नालियां जाम हैं। आगे बढने की है होड़ ऐसी मची हर गली हर सड़क हर चौक...

 मेरे पापा को गए बीस साल बीत चुके हैं

 मेरे पापा को गए बीस साल बीत चुके हैं। मेरे पापा का ये पत्र 27 साल पहले मेरी शादी के 20 दिन बाद मुझे...

जैसी सोच होगी वैसे विचार होंगे।

जैसी सोच होगी वैसे विचार होंगे। आदमी ऐसे यहां कई आबादहोंगे।। बापू ने कितना सोचा देश के लिए। की एक दिन हम भी आज़ाद होंगे।। बुद्ध ने तो...

जिनका क्षर होवै नहीं,अक्षर वो कहलाय

जिनका क्षर होवै नहीं,अक्षर वो कहलाय। अक्षर-अक्षर जोड़कर,शब्द कई बन जाय।। शब्द बहुत छोटे दिखे,प्रबल करें पर मार। धूप - छाँव,सुख - दुख लिए,आते बारंबार।। शब्द  दिवस  हैं...

औलाद पर वालिद  की नजर होती है। 2017

औलाद पर वालिद  की नजर होती है। मां की दुआ से जिंदगी मुन्नवर होती है! अदम से अदीब का  सफर  तय किया अफसुर्दा सी जिंदगी की गुजर...

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