तू जिन्दगी में मुस्कुरा बेवजह

तू जिन्दगी में मुस्कुरा बेवजह

61
0
SHARE

तू जिन्दगी में मुस्कुरा बेवजह
बस गीत लब पर गुनगुना बेवजह !

धोखे कपट से जीत लेते सभी
तू प्यार से सबको हरा बेवजह !

सबके दिलों से तम मिटाकर यहाँ
बस नेह का दीपक जला बेवजह !

तू दूसरों को बस ख़ुशी बाँट दे
अपने गमों को यूँ भुला बेवजह !

शिकवे मिटा सबके दिलों से यहाँ
रूठे हुओं को अब मना बेवजह !

उन कंटकों को भी गले से लगा
बन फूल अब तू खिलखिला बेवजह !

मदमस्त होकर झूम तू हर घड़ी
बन कोकिला अब चहचहा बेवजह !

हक़ के लिए लड़ तू मगर झुक नहीं
अपने कदम आगे बढ़ा बेवजह !

कुछ कर दिखा ऐसा जगत में भला
सबके दिलों में अब समा बेवजह !

अब मौन रहने का नहीं फायदा
अपनी कलम को तू चला बेवजह !

अब ‘सोनिया’ तुझसे कहे और क्या
तू नेक कर्मों को निभा बेवजह !
******************************

डॉ सोनिया 
स्वरचित/मौलिक 
सर्वाधिकार सुरक्षित

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY