ये घटना मुग़ल काल की है , जब मुग़ल किसी राज्य पर आधिपत्य स्थापित कर लेते थे तब , वहा  की स्त्रियों को उठा लिय करते थे , और जाबाज सिपहियो को इनाम के तौर पर दे देते थे , एक बार कल्याण प्रान्त पर मुगलों और मराठाओ के बीच भीषण  युद्ध चल रहा था , शिवा  जी महाराज अपने महल में बैठे युद्ध परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे थे |तभी उनके एक मंत्री ने शिवा जी को समाचार दिया की सेनापति सोनदेव के नेतृत्व में कल्याण प्रान्त मराठाओ ने जीत लिया है , हमारी सेना ने सूबेदार अहमद   खान को सेना सहित मार भगाया | तब सेनापति सोनदेव दरबार में  शिवा जी महाराज के सम्मुख उपस्थित हुए , और बोले – श्रीमंत मैं  आपके लिए युद्ध में जीती हुई कुछ भेट लाया हु | शिवा जी महाराज ने कहा – प्रस्तुत करो , तब सेनापति  के  आदेश पर सैनिक पालकी लिए  आये , उस पर से  पर्दा हटा कर सेना पति ने कहा – श्रीमंत ये सूबेदार अहमद खान की  पुत्रवधू है , इसकी सुन्दरता पूरे विश्व में प्रसिद्द है , मैं इसे आपको भेट करता हु | इतना सुनते शिवा जी महाराज गुस्से के लाल हो गये , और बोले – तुम्हारा साहस कैसे हुआ बिना अनुमति  स्त्री को हाथ लगाने का , हमारी शत्रुता अहमद खान से है इस स्त्री  ने क्या किया है ? और ये बोल  सेना पती को दरबार  से निष्काषित कर दिया | तब शिवा जी महाराज ने  उस युवती को अपनी माँ जीजा बाई     के बगल    बैठाया   और कहा – यदि मेरी माता भी इतनी  सुंदर  होती   तो मैं भी  बहुत सुंदर होता |

ऐसे थे हमारे वीर शिवा जी और इतने महान थे उनके संस्कार |

कहानी कैसी लगी कमेंट में जरुर बताये |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *