बस्ती,ब्यूरो वाहिद अली : सरकार जिलों के सरकारी अस्पतालों में लाख दावा करे कि मरीजों को बेहतर इलाज व चिकित्सा सेवा प्रदान हो रही है लेकिन, हकीकत यहां बिल्कुल उलट है। गुरुवार को जिला अस्पताल की सारी व्यवस्था की पोल खुल गई। चिल्ड्रेन वार्ड में इंसेफ्लाइटिस से पीड़ित किशोरी को बेड नहीं मिला और उनके परिजन फर्श पर लिटाकर डाक्टर का इंतजार करते रहे। फिर भी अस्पताल प्रशासन की संवेदना नहीं जागी, हद तो तब हो गई पीड़ित किशोरी की बूढ़ी दादी अपने आंसू नहीं रोक पा रही थी बार-बार बच्ची का चेहरा निहार रही थी।

बता दें कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर ग्राम रमवापुर निवासी 14 वर्षीय नाजमा पुत्री सफी मोहम्मद को 15 अप्रैल को तेज बुखार की सूचना पर भर्ती कराया गया। चिकित्सक डा. पीके चौधरी ने देखा। जांच में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस ¨सड्रोम (एईएस) की पुष्टि हुई। हालत में सुधार न होने पर 12वें दिन गुरुवार को चिकित्सक ने रेफर कर दिया। इस दौरान स्टाफ ने वार्ड से बाहर कर दिया, हालत बिगड़ने पर चिल्ड्रेन वार्ड परिसर में ही फर्श पर पीड़िता को लिटा दिया। पीड़िता की दादी मां सायरा ने बताया कि पैसे न होने से मेडिकल कालेज नहीं ले जा पा रहे हैं, घर ले जाएंगे। पैसा होगा तो इलाज कराएंगे। वहीं प्रभारी प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल डा. राम प्रकाश ने बताया कि यह तो लापरवाही है कि बेड न होने पर उसे फर्श पर लिटा दिया गया। इसकी जांच कराई जाएगी। जब तक वाहन की व्यवस्था न हो जाए, मरीज को वार्ड से बाहर नहीं किया जा सकता।

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