यु तो आसमान में कई सितारे होते है , पर ध्रुव तारे को हम अलग से ही पहचान लेते है , ध्रुव को  अलग बनाती है उसकी विशेष चमक | बिलकुल इसी तरह हमारे देश के हर राज्य में कई पार्षद होते है , पर हम कितनो  को जानते है , कई मतदाता  तो ऐसे होते है उन्हें अपने पार्षद तक का नाम नही पता होता , उसका सीधा सा कारण है , कभी ऐसा कुछ किया ही नही , की जाने या जानना चाहे | पार्षद का चुनाव हमारे देश में संवैधानिक और प्रत्यक्ष तौर पर चुना जाने वाला बहुत छोटा पद है , किसी भी पार्षद के अधिकार बहुत सीमित होते है | पर यदि संकल्प दृढ  हो और इरादा मजबूत तो  इन सीमित अधिकारों में भी बहुत कुछ किया जा सकता है , और इस बात की जीती जागती मिसाल है विश्वजीत राणा जी | विश्वजीत राणा जी 2015 में राजस्थान (धौलपुर) के वार्ड नंबर – 16 से भाजपा के टिकेट से पहली बार पार्षद चुने गये है | अभी उन्हें पार्षद बने  मात्र 2 वर्ष ही हुए है , 2 वर्ष  में ही वार्ड – 16 खुले में शौच मुक्त हो गया है | उनके इस सराहनीय कार्य की राजस्थान से दिल्ली तक तारीफ़ हो रही है और विश्वजीत राणा जी इस प्रसंसा के असल हकदार भी है |

इतना कार्य करने के पश्चात भी जब विश्वजीत राणा जी से हमने पुछा – क्या अब भी कोई काम करना बाकी है ? तो उन्होंने कहा की अभी उन्हें अपने क्षेत्र में सीमेंट कंक्रीट सड़के बनवानी है , उन्होंने बताया की बोर्ड में कांग्रेस के सदस्य होने की वजह से इस कार्य में विलंभ हो रहा है |

राजस्थान में होने वाले विधान सभा चुनाव के बारे में उनका कहना है की इस बार वसुंधरा राजे सिंधिया के नेतृत्व में भाजपा पूर्ण  बहुमत से भी बहुत ज्यादा सीटे हासिल करेगी |

बहरहाल विश्वजीत राणा जी ने जो कार्य किया है वो वास्तव  में प्रशंसनीय है , और देश के बाकी पार्षदों को भी उनसे सीखना चाहिए |

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