क्या है नर ? क्या है नारी ?

क्या है नर ? क्या है नारी ?
दोनों रुप समान हैं !
रचना कार की रचना का ,
ये दिव्य स्वरुप महान हैं !!
जब इश्क में नर नारी मिलें ,
स्वयं का मूल स्वरुप ही भूले!
तन मन धन सभी भूलकरके,
दो जिस्म मगर एक जान  बनें !
भूल जाते वो तेरा मेरा ,
बन जाते दोनों सांझ सवेरा !
अर्धनारीश्वर का रुप धरकर ,
लेते दोनों एक दूजे का मन हर !
स्वभाव संस्कार एसा सुहाए ,
जेसे दूध पानी को मिलाए !
कई वर्ष जो साथ रहते ,
चेहरे भी उनके हैं मिलते !
दुनियां सारी उनसे कहती ,
प्रभु कृपा है तुमपे बरसती !
बातों में इनके होती गहराई ,
एक धूप तो दुजा परछाई !
सूरज चांद की उपमा प्यारी ,
पुरुष गरम तो ठंडी नारी !
कितने करलें इनका बखान ,
ये तो है ईश्वर की शान !
कुसुम त्रिवेदी
 ( दाहोद )

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