वामपंथ या विनाश पथ

वामपंथ या विनाश पथ

अभय प्रताप सिंह

वामपंथ एक ऐसा विचार जिस के समर्थक स्वयं को सबसे बड़ा बुद्धिजीवी समझते हैं , और भी ऐसी कई उपाधियां है जिससे वामपंथियों ने स्वयं को पुरस्कृत कर खा है जैसे संविधान हितेषी, धर्मनिरपेक्ष, देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता और स्वतंत्रता के संरक्षक | लेकिन इन सब शब्दों से वामपंथ का क्या रिश्ता है इसे जानने के बाद आप भी वामपंथ को वही कहेंगे जो मैं कहता हूं “भ्रम पथ ” | मैं ऐसा क्यों कहता हूं इस लेख में आपको बताता हूं |

वामपंथ या विनाश पथ
मानवेंद्र नाथ रॉय

ज्यादा पीछे नहीं जाएंगे वामपंथ के जनक मार्क्स, लेनिन ,स्टालिन, माओ त्से तुंग ईगल इन सब के बारे में आप कहीं से भी पढ़ सकते हैं, कि कैसे इन्होंने समानता के नाम पर विश्व में नरसंहार किया और दुनिया को संघर्ष का मार्ग दिखाया , वामपंथियों ने दुनिया को बताया की अपना हक लेकर रहना चाहिए , चाहे इसके लिए को राष्ट्र के विरुद्ध ही क्यों ना जाना पड़े । पर यदि भारत के परिपेक्ष में वामपंथ को देखा जाए तो मानवेंद्र नाथ रॉय भारत के पहले वामपंथी माने जाते हैं ।

 

1920 ई में मानवेंद्र ने ताशकंद मे भारतीय प्रवासियों के सहयोग से भारतीय साम्यवादी के गठन की घोषणा की। 1924 ई में भारत में सत्य भक्त ने यह घोषणा की कि उसने भारतीय साम्यवादी दल की स्थापना कर दी है और वह उसका सचिव है । 1928 ई साम्यवादी दल ने मुंबई में अनेक हड़ताल करवाई । इस प्रकार 1934 भारत में साम्यवादी आंदोलन ने प्रतिष्ठा प्राप्त कर ली , भारत में साम्यवादी विचार धारा स्थापित हो गई । परंतु झूठ और हिंसा के कंधों पर खड़ी इस विचारधारा की कलई द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान खुलनी शुरू हुई । पहले तो वामपंथियों ने युद्ध को साम्राज्यवादी युद्ध घोषित कर अंग्रेज विरोधी संघर्ष के लिए प्रेरित किया परंतु जब हिटलर ने 1941 में सोवियत संघ पर आक्रमण किया तो वामपंथियों ने लोक युद्ध नारा देकर अंग्रेजों का पक्ष लिया , इसका कारण था वामपंथियों की नीति इस काल में मुस्लिम समर्थन की थी, इसने मुस्लिम  और कांग्रेस के मतभेदों को बढ़ावा दिया और अलगाववाद की भावनाओं को धारा । इसी कारण स्वतंत्रता प्राप्ति के समय यह विचार अपनी प्रतिष्ठा खो बैठा ।

जेएनयू में बैठे वामपंथी दिन रात बाबासाहेब और उनके संविधान की कसमें खाते हैं परंतु आपको यह जानकर हैरानी होगी की बाबासाहेब अंबेडकर कहा करते थे की मेरे द्वारा बनाए गए इस संविधान को वामपंथी कभी भी नहीं मानेंगे । बाबा साहब का कथन इस बात को स्पष्ट करता है की वे वामपंथियों के इरादों से कितने परिचित थे ।

1975 जब देश में इंदिरा गांधी ने आपातकाल घोषित कर दिया तथा भारतीयों को सभी अधिकारों से और सभी प्रकार की स्वतंत्रता से वंचित कर दिया गया तब, जहां एक तरफ इस देश के सभी नेता और जनता कांग्रेस की इस तानाशाही के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे उस वक्त स्वतंत्रता अभिव्यक्ति और संविधान की कसमें खाने वाले वामपंथी इंदिरा गांधी का समर्थन कर रहे थे ।

जेएनयू मैं बैठे वामपंथी कहते हैं यह देश संविधान से चलेगा लेकिन जब भारत का उच्चतम न्यायालय संविधान के अनुसार एक आतंकी अफजल गुरु को फांसी देता है तो वामपंथी उसे एक हत्या करार देते हैं और अफजल गुरु जैसे आतंकी की बरसी बनाते हैं ।

वामपंथ या विनाश पथ

वामपंथ ने दुनिया को केवल हिंसा तानाशाही प्रदान की है ,इसीलिए वामपंथ और वामपंथियों से सदैव दूरी बना कर रखें , क्योंकि यह आपसे बहुत अच्छी बात करेंगे गरीबी की बात करेंगे रोजगार की बात करेंगे संविधान की बात करेंगे एकता की बात करेंगे , परंतु इनका लक्ष्य सदैव आपके राष्ट्र के और आपके विरोध में होगा, आप कहेंगे भारत माता की जय, वामपंथी कहेंगे         भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह , आप कहेंगे दुर्गा माता है , वामपंथी कहेंगे दुर्गा वेश्या है ,                                                        आप कहेंगे अफजल गुरु आतंकी है, वामपंथी कहेंगे अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा है ।   अब आप सोचिए क्या आप किसी ऐसे विचार का समर्थन कर सकते हैं ?

 

वामपंथ या विनाश पथ

 

यह लेख off track news के लिए अभय प्रताप सिंह जी ने लिखा है

 

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