गणतंत्र दिवस समारोह धूम धाम से मनाया जा रहा था । सीमा पर शहीद हुये सैनिकों के परिवार गण पुरस्कार ग्रहण करने के लिये पंक्तिबद्ध थे। माइक पर आवाज़ आयी पुँछ सेक्टर में हवलदार सुखी सिंह ने आतंकवादी मुठभेड़ में चार आतंकियों को मार गिराया और लड़ते हूये स्वयं वीर गति को प्राप्त हुये उनकी पत्नी इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सकीं और चल बसीं। हवलदार सुखी सिंह जी की बेटी बलविंदर आयु १३ वर्ष व पुत्र हरभजन आयु १५ वर्ष अशोक चक्र ग्रहण करेंगे।
बच्चे सलामी मंच की ओर जा रहे थे लोगों की आँखें आसुओं से भीग रही थीं इतनी छोटी आयु बिना माता पिता के, कोई सोच नहीं सकता।
पुरस्कार देने के पश्चात् राष्ट्रपति जी ने बच्चों के सर पर हाथ रखा और कहा ,”कभी अपने को बिन माता पिता के मत समझना मैं और सारा देश आपका परिवार है । आपकी हर ज़रूरत में हम आपके साथ रहेंगे।”
बालविंदेर और सुखविंदर का सर पिता की याद में गर्व से तन गया। आँसू आँखों में झिलमिला रहे थे और उन्हें लगा कि अब वह अनाथ नहीं हैं।

रचना उनियाल
बंगलुरु(कर्नाटक)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *