वैभव दुबे

बहक के इधर उधर जाऊं हो नहीं सकता
मैं भूल अपना ही घर जाऊं हो नहीं सकता

जरूर उसने नज़र से पिलाई है मुझको
शराब पी के बिखर जाऊं हो नहीं सकता

जुदा है उसकी अदा जो फिदा हुआ हूँ मैं
किसी भी हुस्न पे मर जाऊं हो नहीं सकता

मेरा ये जिस्म मेरी जान भी तुम्हारी है
वादा ये कर के मुकर जाऊं हो नहीं सकता

करूँगा तुमसे इबादत सी मुहब्बत वैभव
सफर में ग़म से मैं डर जाऊं हो नहीं सकता

                                                    वैभव दुबे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *