छुट्टी का है दिन आज गपसप लगा रहे।
सीढ़ियों पे बैठी दादी संग बतिया रहे।

गुड़िया भी खिड़की के पास खड़ी बतियाती।
बातों बातों में ही वे ठहाके भी लगा रहे।

मुन्ना खड़ा दरवाजे पर देख सुन रहा।
दादी की मसखरी में हां में हाँ मिलाता है।

आज शाला नही जाना छुट्टी का मिला बहाना।
गीत गा के मुसकाके सबको सुनाता है।

स्वरचित
शिव कुमार लिल्हारे

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