विपक्षी दलों ने कांग्रेस की अगुवाई में शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू से मुलाकात की और उन्‍हें इस संबंध में नोटिस दिया। हालांकि विपक्ष में एकजुटता का अभाव साफ दिख रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी और लालू प्रसाद यादव की आरजेडी ने इस प्रस्ताव से फिलहाल खुद को दूर रखा है।

नई दिल्ली: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए निर्णय लेने में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चेयरमैन एम वेंकैया नायडू कुछ समय ले सकते हैं। वो ये देखेंगे कि क्या जांच कराने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं। उपराष्ट्रपति इस संबंध में राय ले सकते हैं और कोर्ट के रिकॉर्ड्स भी मंगवा सकते हैं। अगर वह आश्वस्त नहीं है, तो शिकायत आगे नहीं बढ़ेगी। सीजेआई के खिलाफ मामले की अत्यधिक राजनीतिक प्रकृति को देखते हुए राज्यसभा अध्यक्ष को यह तय करने की आवश्यकता होगी कि शिकायत पर आगे बढ़ा जा सकता है या नहीं।

वह इस तथ्य भी विचार करेंगे कि सीजेआई के खिलाफ जांच कराने का कोई भी निर्णय न्यायपालिका की सार्वजनिक धारणा और सीजेआई दीपक मिश्रा की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा विपक्षी सूत्रों ने संकेत दिए है कि यदि नोटिस मंजूर नहीं किया गया, तो वे सुप्रीम कोर्ट को शिकायत पर विचार करने के लिए ऊपरी सदन के अध्यक्ष को निर्देश की मांग कर सकते हैं।

विपक्षी दलों ने कांग्रेस की अगुवाई में शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू से मुलाकात की और उन्‍हें इस संबंध में नोटिस दिया। हालांकि विपक्ष में एकजुटता का अभाव साफ दिख रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी और लालू प्रसाद यादव की आरजेडी ने इस प्रस्ताव से फिलहाल खुद को दूर रखा है। खुद कांग्रेस के अंदर भी इस प्रस्ताव को लेकर मतभेद दिख रहा है। कांग्रेस के इस प्रस्ताव पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी निशाना साधा है।

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