बाद तेरे कहाँ जिया हूँ मैं
मुद्दतों से नहीं हँसा हूँ मैं

गैर तो गैर थे उन्हें छोड़ो
हाथ अपनों के ही लुटा हूँ मैं

आएगा काम एक दिन तेरे
मान ले बात मशवरा हूँ मैं

कृष्ण तो हूँ नहीं मगर देखो
कृष्ण जैसा तेरा सखा हूँ मैं

अब तो मुझ पर रहम करो थोड़ा
दर्द अब तुमसे थक चुका हूँ मैं

तेरे सदके ये सर झुकाया है
इससे पहले नहीं झुका हूँ मैं

आसरा देखना ” कुमुद “मेरा
लौट कर जल्द आ रहा हूँ मैं

— कुमुद साहा

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