लघुकथा ” गंदी बात”

” शुक्र है मिट्ठू सो गई”, कहती हुई कुमुद सोफे पर अधलेटी सी बैठ गई। मिठ्ठू यानि उसकी तीन साल की नातिन।जब से से वो यहां नानी के पास आई है ,कुमुद की पूरी दिनचर्या मिट्ठू के इर्द गिर्द ही सिमटकर रह गई है।
मुस्कुरा उठी कुमुद, कहाँ तो सारा दिन काटे नही कटता था और अब फुरसत ही नही मिलती। बेटी की शादी के बाद कुमुद और रवि ही घर मे एक दूसरे के साथी थे या फिर टी वी ओर मोबाइल।
” अरे हाँ, कबसे मोबाइल नही देखा! लाओ देखूं तो व्हाट्सअप पर क्या मैसेज आये है”, कहती हुई कुमुद मोबाइल उठा कर मैसेज देखने लगी।
” नानी! गंदी बात!! जब कोई आपके पास बैठा हो तो मोबाइल नही देखते, ऐसा मम्मी कहती है।”
कुमुद चौंक गई आवाज सुनकर।” अरे मिट्ठू तुम उठ गई! सॉरी बेटा पता ही नही चला! सही कहा मिट्ठू आपकी मम्मी ने, ये लो मोबाइल साइड में रख दिया । अब जल्दी से गोदी आ जाओ”, मिट्ठू की तरफ हाथ फैलाते हुए कुमुद हँस पड़ी। मिट्ठू को गोद मे लेते हुए उसे लगा जैसे जमाने भर की खुशियां उसकी गोद मे हैं।
स्वरचित
कुसुमलता चांडक

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