गीता के घर से जोर जोर से रोने की आवाज आई। आस पास रहने वाले सभी लोग वहाँ पहुंच गये।गीता अकेली थी। बेटा पढाई के करण बाहर रहता था। सभी ने मिलकर गीता का रोना शांत करवाया। पुछने पर पता चला की उसके पति के खास दोस्त या यूँ समझो दो जिस्म मगर एक जान थे। स्वर्ग सिधार गये हैं। धीरे धीरे सभी उठकर अपने अपने घर चले गये। सिर्फ गीता की एक सहेली रुकी जो गीता के हर सुख दुख की साथी थी। दोनों सहेली थोडी देर में स्वस्थ हो बात करनें लगी।
गीता ने बताया ” सुन सीता मेने आज तक तुझे एक राज नहीं बताया जो सिर्फ मैं और मेरे पति जानते हैं सीता बोली ” कोनसा राज ?
तब गीता ने बताया “हमारी शादी हुई पर पता चला बच्चे नहीं होगें। इनमें कुछ कमी थी। तब इन्हीं के कहने पर मुझे बेटा हुआ और थोडे समय बाद इनका देहांत हो गया। आज इनके दोस्त ही नहीं पर “मेरे बेटे के पिता” स्वर्ग सिधार गयें हैं। आज मेरा बेटा अनाथ हो गया । सीता ने गीता से पूछा “क्या ये बात तुम्हारा बेटा जानता है ? तब गीता ने कहा “नहीं” वो तो बेचारा अपने पिता की मृत्यु पर रो भी नहीं सकता।
सीता अवाक रह गयी और एक नजर गीता को देखती रही।
मन ही मन सोचती रही वाह रे भारत देश और भारत की पतिव्रता नारियाँ।
—————————————————————————————–

स्वरचित कुसुम त्रिवेदी (दाहोद)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *