मुद्दतों  के   बाद   पहचाना   हमें।
आपने  कुछ  देर   से जाना  हमें।।

जिंदगी  की  राह  में  मिलते  रहे..
सिर्फ तुमने  अजनबी  माना  हमें।

क्यूं  भला  तुम  देर  तक यूं दूर थे..
बैठकर अब  साथ  समझाना हमें।

छांव  में तो  साथ  चलते हैं सभी..
धूप  में  भी  आप  अजमाना हमें।

मैं   बना   साया  रहूंगा  संग  अब
हर जगह पर अब सनम पाना हमें।

छोड   दो   बातें  पुरानी  जो   हुईं..
फिर कभी मत देख बिसराना हमें।

लिख रहा रोहित गजल  तेरे  लिए ..
बस  नहीं  आया  उन्हें  गाना  हमें।

 

 

 

 

 

रोहित सिंह 

 

 

 

 

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