उत्तर -पूर्व -पश्चिम में देश के
कोहराम उठा, हा-हा कार मचा
पद्मावत क्या ही फ़िल्म आई
राजपूतो में गुस्सा जल उठा
मच गया संग्राम
सड़को, और सिनेमाघरो में
बिगड़ा सब काम।।

जी हाँ! बात है बड़े ही ताज़ा विषय की जो कई दिनों से लहरों की भांति करवट ले रहा है। हिंदी सिनेमा के जाने-माने निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली की पद्मावत एक विवादित विषय बन चुका है। क्या यह सिनेमाघरो में दिखाई जानी चाहिए या नहीं, इसकी चर्चा कई बार कोर्ट में की गई है परंतु भारत की जनता की सूई मानो फिल्म के विरुद्ध यूँ अटक गई है कि फ़िल्म नहीं दिखाई जाए। लोगों के गुस्से और विरोध की आग ने सुप्रीम कोर्ट को भी बार-बार सुनवाई लेने पर मजबूर कर दिया। सवाल यह उठते हैं कि आखिर क्यों पद्मावत को रोका जा रहा है? क्या विरोध करने वाले उस सदी में मौजूद थे? क्या राजपूत सब तथ्य भली-भांति रूप से जानते हैं? एक फ़िल्म को बिना देखे उसका इस तरह तोल करना बिल्कुल गलत है। संजय लीला द्वारा दर्शायी ऐसी कई ऐतिहासिक फिल्में हैं जो लोगों को बेहद पसंद आई फिर क्यों इस बार इतना हल्ला? फ़िल्म में इतने बदलावों के बाद भी लोग पद्मावत खतरे की घंटी रही। करनी सेना द्वारा किया व्यवहार क्या दर्शाता है? यूँ आग लगा देना, तोड़ -फोड़ मचाना हाल है? ये तो मानो यूँ हो गया कि सब राजपूत रानी पद्मावती की कहानी अच्छे से जानते हैं। सेंसर बोर्ड एवं सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को भी लोग नकार रहे हैं, इससे ना केवल हमारी एकता को ठेस पहुँच रहा है बल्कि यह सिद्ध हो रहा है कि भारतीय भारत से नहीं, खुद को अपने राज्य, कुल, और जाति से पहचान रखने में खुश हैं। एक- दूसरे को धमकाना, मारना, सिर्फ इसलिये कि फ़िल्म पर्दे पर न दिखाई जाए, अति शर्मिन्दा करने वाली परिस्थि है। ऐसे तो भारत को कानून की ज़रूरत नहीं, सभी फैसले खुद दुश्मनी से लेने तो स्वाभाविक यही दर्शाता है। करणी सेना को यह समझना चाहिये कि नुकसान अपना ही हो रहा है किसी पराये का नहीं। आशा करने के अतरिक्त कोई आम आदमी कुछ नहीं कर सकता कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध न जाते हुए स्वयं पर ध्यान दें एवं कोई शिकायत है तो फ़िल्म आप मत देखें। बात वहीं थम जाती है।

इतिहास को यूँ ना परखों यारों कि आज पर ही दाग लग जाएं ,
यह छोटी सी बात एवं ज़िद पर अपने न मिट जाएं।
गुरुर करना ही है तो खुद की पहचान पर करो
यूँ दूसरों में कमी निकाल कर न निर्दोष को मारो।।

कनिका गुलाटी

4 thoughts on “पद्मावत फिल्म या बस विवादित विषय ||”

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