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रदीफ़-छोड़ आये है

प्यार की हम राजधानी छोड़ आये है।
हम तिरी आंखों के मानी छोड़ आये है।।

था अगर कोई भी दुख तो बाँट लेते तुम।रदीफ़-छोड़ आये है

प्यार की हम राजधानी छोड़ आये है।
हम तिरी आंखों के मानी छोड़ आये है।।

था अगर कोई भी दुख तो बाँट लेते तुम।
कब तिरी आंखों में पानी छोड़ आये है।।

वो हमें बूढ़ा बताकर छोड़ देते है।
जिनके लिए अपनी जवानी छोड़ आये है।।

हम गुजर जाये जहाँ से दास्ताँ बनती।
हम समंदर में रवानी छोड़ आये हैं।।

प्यार की ऐसी हक़ीक़त देख ली हमने।
प्यार के किस्से कहानी छोड़ आये हैं।।

रात में बस तम ही मिलता कह रहे थे जो।
उनके घर इक़ रातरानी छोड़ आये हैं।।

(स्वरचित)
राहुल गर्ग

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