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तीन तलाक पर बिल लोकसभा में पेश, कोई संशोधन नहीं लाएगी कांग्रेस, सिर्फ सुझाव देगी

केंद्र सरकार तीन तलाक को आपराधिक घोषित करने वाले विधेयक को आज लोकसभा में पेश किया गया। कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद मुस्लिम महिला (शादी के अधिकार का संरक्षण) विधेयक को पेश किया। उन्होंने कहा कि तीन तलाक पर कानून महिलाओं के हक में है। उन्होंने आज के दिन को ऐतिहासिक करार दिया। बिल का AIMIM, टीएमसी, आरजेडी, बीजेडी जैसे विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं।

 

बिल में क्या है?
द मुस्लिम विमिन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज) बिल में तीन तलाक की पीड़ितों को मुआवजे का भी प्रावधान है। इस बिल को गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अगुआई में एक अंतरमंत्रालयी समूह ने तैयार किया है। इसके तहत किसी भी तरह से दिया गया इन्सटैंट ट्रिपल तलाक (बोलकर या लिखकर या ईमेल, एसएमएस, वॉट्सऐप आदि के जरिए) ‘गैरकानूनी और अमान्य’ होगा और पति को 3 साल तक जेल की सजा हो सकती है। इस बिल को सुप्रीम कोर्ट के 22 अगस्त के फैसले के बाद तैयार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित किया था। बिल के मसौदे को 1 दिसंबर को राज्यों को विचार के लिए भेजा गया था और उनसे 10 दिसंबर तक जवाब मांगा गया था।

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