दीवाली के साथ ही, धनतेरस त्यौहार,
धनतेरस पर आइए,  लिख दें दोहे चार।।1।।

बर्तन, गहनों से पटा है पूरा बाजार,
जिनके घर पैसे नहीं वे सब हैं लाचार।।2।।

लछमी माँ कर दो कृपा,भर दो मेरी जेब,
लाकर दूँ बाजार से, पत्नी को पाजेब।।3।।

त्यौहारों की बाढ़ में, मँहगाई की  मार,
धनतेरस कैसे  मने,  मिलता नहीं उधार।।4।।

विद्या भूषण मिश्र “जफ़र”


(स्वरचित)

2 thoughts on “त्यौहारों की बाढ़ में, मँहगाई की  मार, ”

  1. आपका बहुत बहुत आभार । धनतेरस एवं दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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