उसने दिन- रात मुझे सताया इतना की…

नफ़रत भी हुई और मोहबत भी हो गयी ,

उसने नज़ाकत से मेरे हाथो को छुआ की…

रोज़ा भी ना टूटा और इफ्तारी भी हो गयी,

उसने इस एहतराम से मुहसे मोहबत की…

की गुनाह भी हो गया और इबादत भी हो गई,

मत पूछो उसके प्यार करने का अंदाज़ कैसा था…

उसने इस तरह से सीने से लगया की,

मौत भी ना आई और जन्नत भी मिल गई..

IKRA NAZMA KHAN

 

One thought on “उसने….”

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