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यकीन रिश्तों पर अब होता नहीं।
जोर मुहब्बत में अब चलता नहीं।।
पागल दिल है जाने कब मचल जाए।
इसकी छटपटाहट का पता चलता नहीं।।
हर कोई सूरज समझने लगा दोस्तों।
सच कहूँ तो जिनमें तारों इतना आलोक नहीं।।
रात के घोर तिमिर में सो रहे लोग यहाँ।
सच का उजाला करने वाले अब लोग नहीं।।
अब फिर से राम कृष्ण गौतम होंगे क्या।
पूछता हूँ सबसे ये कलियुग की शुरुआत तो नहीं।।
गाँधी जो विश्व को अहिंसा का पाठ पढ़ाते थे।
उसी विश्व मे अब आतंक के सिवा और दीखता नहीं।।
ये दुनियां किस आईने से देखूँ ये सोचता हूँ।
मगर अंतर की सदा कहती आईने सच बोलते नहीं।।
वक़्त ये भी बीत जाएगा फिक्र मत कर।
पुरोहित शान से जीने का मगर अब सलीका नहीं।।
राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”
  98,पुरोहित कुटी,श्रीराम कॉलोनी,भवानीमंडी, पिन326502 जिला- झालावाड़
राजस्थान

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